भारत के पहले CEC (chief election commissioner)

CEC (chief election commissioner)

इस पोस्ट मे  इंडिया के पहले CEC (chief election commissioner)के बारे मे जानने को मिलेगा और साथ मे पहले आम चुनावों  के बारे में बात करते है।  


भारत एक ऐसा देश है जो बहुत से राज्य और केंद्र शासित प्रदेशो  मे बटा हुआ है। भारत के संविधान के तहत एक संसदीय प्रणाली है, जो संघीय सरकार और राज्यों के बीच शक्ति  वितरण को परिभाषित करती है।भारत का राष्ट्रपति देश का औपचारिक प्रमुख होता है।  भारत के पहले CEC (chief election commissioner)  की नियुक्ति 21 मार्च, 1950 को हुए थी। भारत के पहले CEC (chief election commissioner)  Sukumar Sen थे।

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जिनका जन्म 2 January 1898 को हुआ था। जिनका कार्यकाल 21 March 1950 से 19 December 1958 तक था।  उनके नेतृत्व में, चुनाव आयोग ने 1951-52 में और 1957 में भारत के पहले दो आम चुनावों का सफलतापूर्वक संचालन और निरीक्षण किया।

  उन्होंने सूडान में पहले मुख्य चुनाव आयुक्त (chief election commissioner)  के रूप में भी कार्य किया।वह (Padma Bhushan) पद्म भूषण के नागरिक सम्मान के पहले प्राप्तकर्ताओं में से थे। उनकी शिक्षा कोलकाता के प्रेसीडेंसी कॉलेज और लंदन विश्वविद्यालय में हुई थी। उन्हें बाद में गणित में (gold medal )स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया।  1921 में, सुकुमार सेन भारतीय सिविल सेवा में शामिल हुए, और विभिन्न जिलों में आईसीएस अधिकारी के रूप में और न्यायाधीश के रूप में कार्य किया। 1947 में, उन्हें पश्चिम बंगाल का मुख्य सचिव नियुक्त किया गया, जो सबसे वरिष्ठ रैंक था, जो कि आईसीएस अधिकारी ब्रिटिश भारत में किसी भी राज्य में प्राप्त कर सकता था। उनकी मृत्युए 13 May 1963  को (65)साल के उम्र मई हुआ। 

 
पहले चुनाव के दौरान कुल सीटों की संख्या 489 थी जबकि देश में अब 543 संसदीय सीटों पर चुनाव हुआ था। भारत निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार, देश में आज की तरह कम से कम 2,354 दल पंजीकृत हैं, जो 1951-52 में चुनाव लड़ने वाले 53 दलों की तुलना में काफी अधिक है।21 मार्च, 1950 को सुकुमार सेन को सीईसी नियुक्त किया गया था उस समय देश में केवल 17.32 करोड़ मतदाता (जम्मू और कश्मीर को छोड़कर) थे। 1951 की जनगणना के अनुसार, देश की जनसंख्या 35.66 करोड़ थी। फिर, इसका मतलब है कि 48.56 प्रतिशत नागरिक मतदान के पात्र थे।यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि 1951-52 में पहले आम चुनावों के दौरान, केवल 21 वर्ष या उससे अधिक आयु के नागरिकों को वोट देने की अनुमति थी, जबकि अब कट-ऑफ की उम्र 18 वर्ष है। संविधान (साठवाँ संशोधन) अधिनियम, 1988(‘The Constitution (Sixty-first Amendment) Act, 1988’.) के माध्यम से मतदान की आयु 21 से घटाकर 18 वर्ष कर दी गई। 

1951-52 में आम चुनावों को 68 चरणों और 25 अक्टूबर 1951 से 21 फरवरी, 1952 के बीच लगभग चार महीनों के दौरान आयोजित किया गया था। स्वतंत्र भारत में पहले आम चुनाव में 45.7%( प्रतिशत )मतदान हुआ, जबकि 2014 में  66.4 %(प्रतिशत) मतदान हुआ।  जबकि 2019 मे 

67.11% मतदान  हुआ।  

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