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Generation of computer in hindi

आज के पोस्ट का विषय है कंप्यूटर पढिया। अब यहाँ पर पीढ़िया का मतलब कंप्यूटर के तकनीक में विकास से है। कंप्यूटर के विकास उसके  तकनीक के विकास के साथ हुआ। इस तकनीक के विकास को हम पांच भाग में बाटते है। 





1st Generation के कंप्यूटर 


पहली पीढ़ी के  कंप्यूटर की  अवधि 1946-1959 तक थी।पहली पीढ़ी के कंप्यूटरों में  सीपीयू (CPU)सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट के लिए मेमोरी और सर्किट के लिए बेसिक घटकों के रूप में वैक्यूम ट्यूबों का इस्तेमाल किया गया था




इनमे इस्तेमाल ट्यूब, बिजली के बल्ब जैसा था,बहुत अधिक गर्मी पैदा करता था।पहला कंप्यूटर "1946"में अस्तित्व में आया जिसका नाम "ENIAC" था।"ENIAC" को पेनसिल्वेनिया विश्वविद्यालय,U.S के John Mauchly और J. Presper Eckert के द्वारा डिजाइन किया गया था।इसमें 18000 के आसपास वैक्यूम ट्यूबों का इस्तेमाल हुआ था। वैक्यूम ट्यूबों का निर्माण साल 1904 में हुआ था। इस कंप्यूटर का वजन ३०मीट्रिक टन था। 

इस पीढ़ी के कंप्यूटर का कोई भी रख रखाव संभव नहीं था।फेरेंटी मार्क 1 (1951) को पहला व्यावसायिक वैक्यूम ट्यूब कंप्यूटर माना जाता है।पहला बड़े पैमाने पर उत्पादित कंप्यूटर IBM 650 (1953) था।इस कंप्यूटर का आकार बहुत ही ज़्यदा बड़ा होता था।बड़ा होने के कारण इसको रखने के लिए बड़े से रूम की आवश्यकता होती थी जिसके कारण इसको एक जगह से दूसरे जगह ले जाने में परेशानी होती थी।इसमें डाटा को सुरक्षित रखने के लिए PUNCH CARD का इस्तेमाल होता था।इस पीढ़ी के कंप्यूटर मशीनी   के साथ साथ असेम्ब्ली भाषा का इस्तेमाल करते थे।इसमें सभी डाटा 0 और 1 में दिए जाते थे।इसमें बहुत धीरे गति से कोई भी कार्य होते थे। इस तरह के कंप्यूटर जरूरत से ज़्यदा गर्मी निकालते थे। 

2nd Generation के कंप्यूटर  

इस पीढ़ी के कंप्यूटर की अवधि 1959 से 1965 तक थी।दूसरे पीढ़ी का  कंप्यूटर को ट्रांजिस्टर (transistor) कंप्यूटर कहा जाता है।इस पीढ़ी के कंप्यूटर में वैक्यूम ट्यूबों के बजाय ट्रांजिस्टर(transistor)का उपयोग हुआ था।Transistor का अविष्कार "विल्लियम शोकले" ने 1947 में अमेरिका में किया था।Transistor का अविष्कार इस पीढ़ी के कंप्यूटर के लिए लाभदायक साबित हुआ।क्योकि इसके इस्तेमाल करने से कंप्यूटर के छेत्र में काफी विकास हुआ,इस पीढ़ी के कंप्यूटर का इस्तेमाल करना सरल हो गया।ये आकार मे वैक्यूम ट्यूब से छोटा था।इसकी कार्य करने की छमता पहले की पीढ़ी से बेहतर थी।जिसके कारण इसका इस्तेमाल पहले पीढ़ी के कंप्यूटर से ज़्यदा होने लगा।ये पहले पीढ़ी के कंप्यूटर तुलना मे बिजली का खपत कम करता था।इसके रख रखाव की सुविधा थी।इस पीढ़ी के कंप्यूटर पहले के पीढ़ी के कंप्यूटर से साइज में छोटे थे फिर ये बड़े थे,जिसके कारण इसे भी एक अस्थान से दूसरे अस्थान ले जाना कठिन कार्य था।





 इनमे FORTRAN ,COBOL, SNOBAL जैसे भाषा का इस्तेमाल हुआ था IBM 7904 ,UNIVAC 1108  इस पीढ़ी की कंप्यूटर थे।डाटा को सुरक्षित रकने के लिए PUNCH कार्ड के साथ ही DISK का भी इस्तेमाल होता था।कंप्यूटर को ठंडा रखने के लिए वातानुकूलित कमरे की जरूरत होती थी। 


3rd  Generation के कंप्यूटर 

इस पीढ़ी के कंप्यूटर की अवधि 1965  से 1971 तक थी।तीसरी पीढ़ी के कंप्यूटरों में ट्रांजिस्टर(transistor) की जगह इंटीग्रेटेड सर्किट (IC) का इस्तेमाल किया गया था।आईसी(IC)का आविष्कार जैक किल्बी ने साल 1958 में किया था। जैक किल्बी के आविष्कार आईसी(IC) से कंप्यूटर में काफी बदलाव आयेएक एकल (Single)आईसी में संबंधित सर्किटरी के साथ कई ट्रांजिस्टर, प्रतिरोधकऔर कैपेसिटर होते हैं।
IC का आविष्कार जैक किल्बी ने किया था।तीसरी  पीढ़ी का कंप्यूटर का आकार पहले के दोनों कंप्यूटर से छोटा था।तीसरे पीढ़ी का कंप्यूटरों का आकार छोटा, होने के साथ-साथ विश्वसनीय और कुशल बनाया गया था।
इस पीढ़ी के कंप्यूटर मे रिमोट प्रोसेसिंग,और टाइम शेयरिंग के साथ मल्टीप्रोग्रॅमिंग ऑपरेटिंग सिस्टम का प्रयोग किया गया था।





इस पीढ़ी के कंप्यूटर पहले के कंप्यूटर से कम  मात्रा मे  गर्मी पैदा करता था।इस पीढ़ी के कंप्यूटर का रख रखाव सस्ता था। इस पीढ़ी के कंप्यूटर हाई लेवल के भाषा को  समझ सकते थे।इस पीढ़ी का कंप्यूटर मॅहगा हुआ करता था।इस  पीढ़ी के कंप्यूटर में ऑपरेटिंग सिस्टम का इस्तेमाल शुरू हुआ। कंप्यूटर को ठंडा रखने के लिए वातानुकूलित कमरे की जरूरत होती थी। ये कंप्यूटर केवल विशेष उदेश्य को पूरा करते थे। 
इस पीढ़ी के कंप्यूटर के नाम इस प्रकार है ,TDC -316  IBM -370 




4th Generation
 के कंप्यूटर 

इस पीढ़ी के कंप्यूटर में  वीएलएसआई(VLSI) सर्किट का इस्तेमाल किया गया था।



वीएलएसआई(VLSI) सर्किट में एक ही चिप पर लगभग 5000 ट्रांजिस्टर और उनके जुड़े सर्किट के साथ अन्य सर्किट तत्व झुड़े हुऐ होते हैं,चौथी पीढ़ी के कंप्यूटर को माइक्रोप्रोसेसर का उपयोग करके विकसित किया गया था।इंटेल 4004 चिप 1971 में विकसित पहला माइक्रोप्रोसेसर था

माइक्रोप्रोसेसर एक सिलिकॉन चिप है जिसमें लाखों ट्रांजिस्टर होते हैं जो एलएसआई(LSI) और वीएलएसआई(VLSI) तकनीक का उपयोग करके डिजाइन किया गया था। इस पीढ़ी के कंप्यूटर की अवधि 1971 -1980 तक थी।  चौथी पीढ़ी के कंप्यूटर अधिक शक्तिशाली, कॉम्पैक्ट, विश्वसनीय और सस्ते  हो गए। परिणामस्वरूप, इसने पर्सनल कंप्यूटर (P C) क्रांति को जन्म दिया। इस पीढ़ी में, समय साझा करने, वास्तविक समय नेटवर्क, वितरित ऑपरेटिंग सिस्टम का उपयोग किया गया था। इस पीढ़ी  में, सभी उच्च स्तरीय भाषाओं जैसे C, C ++, DBASE आदि का उपयोग किया गया था।इस  समय के  कंप्यूटर बहुत  छोटे थे। इस  पीढ़ी के कंप्यूटर नेटवर्क के क्षेत्र में शानदार घटनाक्रम था।इस पीढ़ी के कंप्यूटर से इंटरनेट का कॉन्सेप्ट पेश किया गया था।इस पीढ़ी के कंप्यूटर MOUSE का इस्तेमाल हुआ।इस पीढ़ी के कंप्यूटर में डाटा को सुरक्षित रखने के लिए  सेमि कंडक्टर का प्रयोग होने लगा इस पीढ़ी के कुछ कंप्यूटर के नाम Star 1000 ,PDP 11 ,CRAY -1 

5th Generation 
के कंप्यूटर
 

इस पीढ़ी की अवधि 1980-आज तक है। इस पीढ़ी कंप्यूटर  मे , वीएलएसआई(VLSI) तकनीक ULSI (अल्ट्रा लार्ज स्केल इंटीग्रेशन) तकनीक से बनाया गया है। 





इस पीढ़ी में इस्तेमाल होने के परिणामस्वरूप माइक्रोप्रोसेसर चिप्स के उत्पादन में दस मिलियन इलेक्ट्रॉनिक घटक है।यह पीढ़ी के समानांतर प्रसंस्करण हार्डवेयर और AI (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) सॉफ्टवेयर पर आधारित है। कंप्यूटर विज्ञान में AI एक उभरती हुई शाखा है, जो कंप्यूटर को इंसान की तरह बनाने के माध्यम और तरीके की व्याख्या करता है। इस पीढ़ी में सभी उच्च स्तरीय भाषाओं जैसे C और C ++, Java, .Net आदि का उपयोग किया जाता है।पांचवीं पीढ़ी शब्द का उद्देश्य मौजूदा मशीनों से परे छलांग के रूप में प्रणाली को व्यक्त करना था। कंप्यूटिंग हार्डवेयर के इतिहास में, वैक्यूम ट्यूबों का उपयोग करने वाले कंप्यूटरों को पहली पीढ़ी कहा जाता था। ट्रांजिस्टर और डायोड से बने कंप्यूटर को दूसरा पीढ़ी कहा गया।एकीकृत सर्किट से बने कंप्यूटर को तीसरा कहा गया।और माइक्रोप्रोसेसरों का उपयोग करने वाले कंप्यूटर को चौथा पीढ़ी का कहा गया।पिछली कंप्यूटर के पीढ़ियों ने एक एकल सीपीयू में तर्क तत्वों की संख्या बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया था।पांचवीं पीढ़ी का कंप्यूटर सिस्टम (एफजीसीएस) जापान के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और उद्योग मंत्रालय (एमआईटीआई) द्वारा एक पहल थी, जो 1982 में शुरू हुई थी, जिसमें कंप्यूटर को व्यापक रूप से समानांतर कंप्यूटिंग और लॉजिक प्रोग्रामिंग का उपयोग करके बनाया गया था। यह 1980 के दशक के दौरान जापान में एक बड़े पैमाने पर सरकारी / उद्योग अनुसंधान परियोजना का परिणाम होना था। इसका उद्देश्य सुपर कंप्यूटर जैसी प्रदर्शन के साथ "युग-निर्माण कंप्यूटर" बनाना और कृत्रिम बुद्धिमत्ता में भविष्य के विकास के लिए एक मंच प्रदान करना है। 

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