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Automated teller machine(ATM) in Hindi । एटीएम का फुलफॉर्म


आज के पोस्ट का विषय है ATM क्या है ?आपके पास भी ATM है ?क्या आप भी एटीएम  सिर्फ इस्तेमाल करते है ?आपको मालूम एटीएम का फुलफॉर्म ?या फिर भारत में सबसे पहले एटीएम कब लगा ?किस बैंक ने लगाया ?मालूम है क्या ?आज इस पोस्ट को पढ़ कर आपको इस पोस्ट के माध्यम से एटीएम के बारे में जानकारी मिलेगी। 





एटीएम का फुलफॉर्म 


एटीएम का फुल फॉर्म  Automated teller machine होता है। 



जो की  केवल बैंक के कस्टमर के उपयोग के लिए होता है। जिससे वो अपने बेसिक बैंकिंग के जरुरतो  को पूरा करते है।  वो भी बिना किसी बैंक के रिप्रेजेन्टेटिव  के सहायता के।  




Automated teller machine(ATM) यह तकनिक का ऐसा एक जटिल रूप जो की  अविष्कारों का एक  ऐसा समूह जिसमे अलग अलग बहुत से अविष्कार का इस्तेमाल हुआ हो। Automated teller machine(ATM) के अविष्कारक Jhon shepherd barron थे।Jhon shepherd barron ने Automated teller machine(ATM) इसका अविष्कार 1960 मे किया था। उनका जन्म ब्रिटिश शासन काल में भारत के मेघालय मे हुआ था।  उनकी जन्म की तिथि 23/06/1925  था। वो Automated teller machine(ATM) में 6डिजिट पिन के पक्ष मे थे लेकिन उनकी वाइफ का सोचना था की 6digit पिन को बहुत लोग याद नहीं रख पाएंगे इस लिए 4डिजिट का पिन चाहिए।जो की  उस  समय से लेकर आज तक चलन में है।  प्रतेक  यूजर को अपना अकाउंट का उपयोग करने के लिए एक स्पेशल  प्लास्टिक कार्ड दिया जाता है ,जिसमे उस अकाउंट होल्डर की सारी जानकारी चिप के माध्यम से  स्टोर होती है।  जैसे ही अकाउंट होल्डर एटीएम  मशीन  में अपना कार्ड डालता है तो उस  कार्ड के माध्यम से वो अपने बैंकिंग के जरुरतो  को पूरा करता है।  एटीएम  मशीन बैंक के सर्वर सिस्टम से कनेक्ट रहता है जैसे ही अकाउंट होल्डर एटीएम कार्ड का उपयोग करता है  उसके दवारा इंटर  की हुई  पिन का मिलान बैंक सर्वर कंप्यूटर से होते ही वो  अपना अकाउंट एक्सेस करने का हक़दार होता है।  एटीएम के अविष्कार होने  के बाद बैंक के बहुत सारे  काम  एटीएम के माध्यम से आसानी से हो जाते है ,और किसी बैंक के कर्मचारी  की भी जरूरत नहीं होती  है।  लेकिन  जब इसके अविष्कारक को ये सुझाव आया होगा  उस समय उन्हें बहुत से कठिनाई  का सामना करना पढ़ा होगा  क्योकि बैंक पैसे की  लेन देन  को बहुत ही अहम मानते है उससे किसी मशीन के हवाले करने को तैयार नहीं थे।बार बार  असफल होने के बाद आखिरकार 1960 मे एटीएम पेटेंट  हो गया। 











भारत मे Automated teller machine(ATM) को मुंबई मे HSBC बैंक ने लगाया था, जो की 1987 मे। Automated teller machine(ATM)  को  सबसे पहले लन्दन  के  बार्कलेज बैंक ने सबसे पहले  27 जून 1967  को पहला  मशीन  लगाया था।  



💢Automated teller machine के इनपुट उपकरण 


1 कार्ड रीडर 
२ कीपैड 

💢Automated teller machine के आउटपुट उपकरण 

1 स्पीकर 
2 डिस्प्ले स्क्रीन 
3 रिसीप्ट  प्रिंटर 
4 कॅश डेपोसिटोर 


Automated teller machine(ATM) मे   2इनपुट  और 4आउटपुट उपकरण   होती है। जो की एक  प्रोसेसर के साथ  जुड़े होते है। यही  प्रोसेसर  ही एटीएम का दिमाग होता है।  सारे  एटीएम  सेंटर  बेस  सिस्टम पर आधारित  होते है।   एटीएम  को होस्ट प्रोसेसर सर्वर के साथ संपर्क करना पड़ता है। होस्ट प्रोसेसर सर्वर भी इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर के साथ संपर्क करता है। यह एक गेटवे की तरह होता है जो की सभी एटीएम नेटवर्क मई उपलब्ध होता है।  जब कोई अकाउंट होल्डर एटीएम का प्रयोग करना चाहे तो उसे अपनी सारी  जानकारी कार्ड रीडर और कीपैड के माध्यम से देनी होगी। एटीएम से सारी जानकारी को होस्ट प्रोसेसर  को भेज देता है। होस्ट प्रोसेसर अकाउंट होल्डर की मांग को उसके बैंक के पास भेज देता है ,अगर अकाउंट होल्डर अपने अकाउंट से पैसे निकलना चाहता है तो होस्ट प्रोसेसर उसके कॉउंट से पैसे निकल लेता है।   एक बार  पैसे अकाउंट होल्डर के  अकाउंट से ट्रांसफर  हो  कर  होस्ट प्रोसेसर के अकाउंट मे आ जाती है ,तब होस्ट प्रोसेसर  एटीएम को  स्वीकार कोड भेजती है और निर्देश देती है की उस ग्राहक को माँगा हुआ  कैश  प्रदान  किया जाये। इस प्रकार आपको एटीएम से कैश मिलता है।  


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💢Automated teller machine(ATM) की उपयोगिता 

👉 इसके उपयोग करके हम कैश निकाल सकते है। 
👉 इसके उपयोग करके हम  अपने नंबर को रिचार्ज कर सकते है। 
👉 इसके उपयोग करके  हम  अपने बिल का भुगतान कर  सकते है। 
👉 इसके उपयोग करके  हम अपने एटीएम का पिन बदल सकते है। 
👉 इसके उपयोग करके हम कैश निकाल सकते है। 
👉 इसके उपयोग करके हम  अपने  अकाउंट का स्टेटमेंट  को जान  सकते है। 
👉 इसके उपयोग करके हम  आकउंट के बैलंस  की जानकारी  पा सकते है। 
👉 इसके उपयोग करके हम एक ही बैंक के नेटवर्क मे पैसे भेज सकते है। 

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