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Pencil in Hindi । पेंसिल का आविष्कार किसने किया

पेन्सिल 

 पेन्सिल की ताकत किसी हथियार से कही ज़्यदा  होती है। अगर यह किसी जज के पास हो तो किसी की की हुए गलती की फैसला लिखने या किसी निर्दोष को सजा मुक़्त करने  वाली होती है ,अगर किसी छात्र के पास हो तो उसकी जिंदगी सवारने वाली होती है। इसमे दो लकड़ी के बीच में ग्रेफाइट होती है जिसे गोंद की सहायता से आपस में चिपकाया जाता है। 
image by pixabay


पेंसिल शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा से हुई है
 लैटिन भाषा के 'पेनीसिलस' से पेंसिल शब्द की उत्पत्ति हुई है जिसका अर्थ पूछ होता है| बहुत समय पहले जानवरो के बाल से ब्रश बनाया जाता था। ब्रिटेन में बहुत साल पहले आये एक तूफान में जब बहुत सारे पेड़ अपने जड़ो के साथ तूफान के प्रभाव से उखाड़ गए थे ,उनमे से किसी पेड़ पर बकरी चराने वाले की नज़र पढ़ी उसने देखा की पेड़ के जड़ो में कला पदार्थ लगा हुआ था जिसे वो कोयला समझ के घर ले आया , और आग में जलाने का प्रयास किया पर उसे जल्द ही समझ आ गया की वह पदार्थ कोयला की तरह नहीं जला। जिसे वो लोग काला पत्थर कहे उस समय और उसका इस्तेमाल अपने जानवरो पर निशान लगाने के लिए करते थे।ये जल्द ही कागज में लफेट कर ब्रिटेन के बाज़ारो में बिकने लगा। 16वी शताब्दी के आखिर समय मे लोग ग्रेफाइट से लिखना शुरू कर दिए थे लेकिन जरूरत से ज़्यदा नाजुक होने के कारण काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था। जिससे लोग उसे दागे में लफेट कर  लिखते थे।18 वी शताब्दी  में ब्रिटेन के राजा जोर्ज द्वितीय ने उस पदार्थ को अपने अधिकार छेत्र  में ले लिया।
1560 में पेड़ के जड़ो में सुराग करके ग्रेफाइट को चिपका दिया जाने लगा ,जिससे लिखने में थोड़ा आसानी हुई।1660 में जर्मनी में लकड़ी के टुकड़ो से पेंसिल बनने  शुरुआत हुई। दो लकड़ी के  टुकड़ो के बिच में  ग्रेफाइट  को चिपका दिया जाता था।1790 में ब्रिटेन और फ्रांस में युद्ध हो गया ,जिसके परिणाम ये हुआ की ब्रिटेन ने फ्रांस को ग्रेफाइट देने से माना कर दिया।ब्रिटेन के बैन के कारण फ्रांस में  ग्रेफाइट की कमी होने लगी ।फ़्रेंच के मिनिस्टर ने अपने एक कमांडर और साइंटिस्ट Nicolas-Jacques Conté को इस समसस्या का हल ढूंढ़ने का आदेश दिया। 
 कुछ समय  के रिसर्च के बाद Nicolas-Jacques Conté ने एक बॉक्स में चिकनी मिट्टी के साथ  ग्रेफाइट और पानी से एक मिश्रण बनाया और जिसे बाद में  सूखने के लिए रख दिया। जब ये मिश्रण सूख गया तो इसे आग के भट्टी में जलाया गया। इसी समंय  Nicolas-Jacques Conté  ने देखा की  चिकनी मिट्टी को कम और ज़्यादा करने से पेंसिल के लिखने में फर्क आने लगा। उस समय से  H HB जैसे अलग अलग नामों से पेंसिल बनना शुरू हो गया। साल 1795 में  Nicolas-Jacques Conté को इस अविष्कार का पेटेंट मिला।


आज के समय में बनने वाली पेंसिल से 55 KM  तक लाइन खीचा जा सकता है। सबसे उत्कृट पेंसिल जो की ग्रेफाईट एवं खडिया के मिस्रण से बनता है। पेंसिल  के अनेक प्रकार से  बाजार में उपलब्ध है। ग्रेफाइट पेंसिल में  कई "ग्रेड" होते हैं जिनमे  9H से ले कर H तक, F, HB, और B से ले कर 10B या 12B तक। H का मतलब "hard" से होता है  और B का मतलब "black" से होता है।

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