Types Of DC Motor in Hindi । डीसी मोटर हिंदी

Dc Motor Kitne Prakar Ki Hoti Hai / Types of Dc Motor in Hindi – Dc Motor जो की Dc supply से चलने वाला मोटर होता है । हम सभी को ये बात मालूम है की मोटर का काम इलेक्ट्रिकल एनर्जी को मेकेनिकल एनर्जी में बदलना होता है । अगर आपको  Motor के बारे में जानना है तो आप Motor In Hindi पर क्लिक करके पढ़ सकते है ।

Types Of DC Motor In Hindi
Types Of DC Motor In Hindi

dc Motor का इस्तेमाल AC Motor की तुलना में कम होता है । लेकिन इसका इस्तेमाल उन जगहों पर किया जाता है जहा पर अधिक मात्रा में टार्क की जरूरत होती है , या अधिक मात्रा में बल की जरूरत होती है । डीसी मोटर हिंदी में आप इसके उपयोग होने जगह के बारे में जानेगे । जैसे DC Motor का इस्तेमाल स्टील मिल, खदानों और सबसे महत्वपूर्ण इलेक्ट्रिक ट्रेन (electric train) में किया जाता है। एक DC-Motor का स्पीड और टार्क AC-Motor से बेहतर होता है ।

Working Principle OF Dc Machine in Hindi – types of dc motor in hindi

DC-Motor / डीसी मोटर का मूल कार्य सिद्धांत यह है कि जब भी कोई करंट ले जाने वाला कंडक्टर चुंबकीय क्षेत्र में होता है, तो वह एक यांत्रिक बल का अनुभव करता है ।फ्लेमिंग का वामहस्त नियम / left-hand रूल और इसका परिमाण इस बल की दिशा को तय करते हैं।

फ्लेमिंग का वाम हस्त नियम/ left-hand Rules – फ्लेमिंग का वाम हस्त नियम/ left-hand Rules के अनुसार यदि हम अपने बाएं हाथ की पहली उंगली, दूसरी उंगली और अंगूठे को एक दूसरे के लंबवत फैलाते हैं, और पहली उंगली चुंबकीय क्षेत्र की दिशा का प्रतिनिधित्व करती है, दूसरी उंगली धारा की दिशा का प्रतिनिधित्व करती है, तो अंगूठा की दिशा का करंट को ले जाने वाले कंडक्टर द्वारा अनुभव किया गया बल के दिशा को दिखती है ।

F = BIL Newtons

फ्लेमिंग का वाम हस्त नियम
फ्लेमिंग का वाम हस्त नियम

जहा पर –

B = magnetic flux density

I = current and

L = length of the conductor within the magnetic field

जब आर्मेचर वाइंडिंग को डीसी आपूर्ति / DC-CURRENT से जोड़ा जाता है, तो वाइंडिंग में एक electric Current विद्युत प्रवाह स्थापित होता है। जो की एक चुंबकीय क्षेत्र प्रदान करता है। इस मामले में, ऊपर बताए गए सिद्धांत के अनुसार, Current ले जाने वाले आर्मेचर कंडक्टर चुंबकीय क्षेत्र के कारण एक बल का अनुभव करते हैं। इस बल के कारण armature चालक, आर्मेचर को घुमाने लगेगा यह लगने वाले बल की दिशा हम फ्लेमिंग के बाएं हाथ के नियम से ज्ञात करते है ।

इसमें जब armature घूमेगा उस समय आर्मेचर के चालक उसमें लगे ब्रश से पार होकर दूसरे तरफ को जाएंगे तो उस चालक मे धारा की दिशा बदल जाएगी और उसके साथ-साथ पोल की ध्रुवता (polarty) भी बदल जाएगी। Polarty के बदलने के कारण लगने वाली बल की दिशा समान रहेगी जिसके फलस्वरूप मोटर लगातार एक ही दिशा में घूमता रहेगा । इस प्रकार dc- मोटर कार्य करता है ।

bACK eMF IN dC MOTOR / DC MACHINE IN HINDI

प्रकृति के नियम के अनुसार, जब तक किसी भी रूपांतरण का विरोध करने के लिए कुछ न हो, तब तक उसमे कोई ऊर्जा रूपांतरण संभव नहीं होता है। जनरेटर के विषय में, चुंबकीय ड्रैग जो की यह विरोध प्रदान करता है, लेकिन अगर बात डीसी मोटर्स का करे तो इसमें बैक ईएमएफ वो विरोध करता है। बैक ईएमएफ की उपस्थिति के कारण ही डीसी मोटर जो की ‘सेल्फ रेगुलेटिंग’ बनता है ।

जब एक मोटर का आर्मेचर घूम रहा होता है, तो कंडक्टर चुंबकीय फ्लक्स लाइनों को भी काट रहे होते हैं और इसलिए फैराडे के विद्युत चुम्बकीय प्रेरण के नियम के अनुसार, आर्मेचर कंडक्टर में एक ईएमएफ प्रेरित होता है।

इस प्रेरित विद्युत वाहक बल की दिशा ऐसी है कि यह आर्मेचर धारा (Ia) का विरोध करती है। नीचे दिया गया सर्किट जो की बैक ईएमएफ और आर्मेचर करंट की दिशा को दिखाता है।

back emf and armature current

बैक ईएमएफ के परिमाण ही मोटर की गति के सीधे आनुपातिक होता है। सोचे अगर कि डीसी मोटर पर लोड अचानक ही कम हो गया है। इस मामले में, वर्तमान टार्क की तुलना में आवश्यक टार्क कम होगा। टॉर्क ज्यादा होने से मोटर की स्पीड बढ़ने लगेगी। इसलिए, गति के समानुपाती होने के कारण, बैक ईएमएफ का परिमाण भी बढ़ जाएगा। बैक ईएमएफ बढ़ने के साथ आर्मेचर करंट कम होने लगेगा। टॉर्क आर्मेचर करंट के समानुपाती होने के कारण, यह तब तक घटेगा जब तक यह लोड के लिए पर्याप्त नहीं हो जाता। इस प्रकार, मोटर की गति नियंत्रित रहती है ।

उसी तरह दूसरी ओर, यदि डीसी मोटर /dc-motor पर अचानक लोड बढ़ जाता है, तो लोड के कारण गति में कमी आने लगेगी । गति में कमी के कारण, बैक ईएमएफ भी कम हो जाएगा जिस कारण अधिक आर्मेचर करंट सप्लाई होने लगता है। आर्मेचर करंट में वृद्धि के कारण लोड की आवश्यकता को पूरा करने के लिए टॉर्क में वृद्धि होने लगेगी ।

types of dc motor in hindi -TYPES OF MOTORS IN HINDI

जैसा की आपने ac- मोटर के अलग अलग प्रकार के बारे में पढ़ा था । ठीक उसी तरह dc- मोटर के 4 प्रकार होते है ।

  • Series DC Motor
  • Permanent Magnet DC Motor
  • Shunt/Parallel DC Motor
  • Compound DC Motors

Construction of DC Motor & dC mACHINE IN HINDI

Construction of DC Motor
Construction of DC Motor

DC MOTOR के Construction के बारे में जानना और समझना होगा। DC-MOTOR के दो मुख्य भाग होते हैं।

1.Armature/आर्मेचर


2.Stator/स्टेटर

किसी भी DC – मोटर का घूमने वाला भाग आर्मेचर होता है । जबकि स्टेटर उसका न घूमने वाला भाग होता है । आर्मेचर कॉइल जो की डीसी सप्लाई से सीधा जुड़ा हुआ होता है।

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